वेल्डिंग का काम सीखने से पहले यह जानना जरूरी है कि वेल्डिंग क्या है। वेल्डिंग लोहे या धातु को जोड़ने को कहा जाता है। लोहे की छड़ों को बिजली से गर्म किया जाता है और पिघलाकर आपस में जोड़ा जाता है। ठंडा होने पर यह जोड़ मजबूत हो जाते हैं और वहीं एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं, इसे वेल्डिंग कहते हैं। जो व्यक्ति लोहे या धातुओं को एक साथ जोड़ने का काम करता है उसे वेल्डर कहा जाता है। यह डिप्लोमा कोर्स है. यह कोर्स आप किसी भी आई टी आई संस्थान से कर सकते हैं या किसी अनुभवी वेल्डर के साथ काम कर सकते हैं। आप वेल्डिंग सीख सकते हैं. एक परफेक्ट वेल्डर बनने के लिए हम कुछ चीजें सीखते हैं जैसे;-
शारीरिक ताकत — वेल्डिंग का काम बहुत कठिन है। इसलिए मनुष्य के पास शारीरिक शक्ति का होना आवश्यक है। तभी वह इस काम को अच्छे से कर पाता है.
आंख और हाथ का समन्वय — वेल्डिंग करते समय हाथ और आंख का समन्वय बनाना होता है। जरा सी लापरवाही से दुर्घटना हो सकती है।
जरूरी उपकरणों का रखें ख्याल — इस काम को करते समय जिस भी चीज की जरूरत हो उसका ख्याल रखना जरूरी है. आपको जो चाहिए उसका तुरंत उपयोग करें।
छोटी-छोटी बातों का रखें ध्यान — वेल्डिंग करते समय छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना पड़ता है। जैसे अगर किसी चीज में जंग लग रही हो तो उसे साफ करके इस्तेमाल करना चाहिए।
उत्तम माप — किसी भी वस्तु को काटने और जोड़ने से पहले माप आवश्यक है। माप के बाद ही हम एक उत्तम वस्तु तैयार कर सकते हैं।
वेल्डिंग के उपयोग कहाँ किया जाता है?
वेल्डिंग घर के छोटे बड़े इलेक्ट्रॉनिक सामान को जोड़ने के काम आता है।
चिकित्सा उपकरणों को वेल्ड करने के लिए इलेक्ट्रॉन बीम वेल्डिंग तकनीकें का इस्तमाल किया जाता हैं।
वेल्डिंग बड़ी बड़ी इमरातो या हाउस गेट बनाने का काम आता है/ वेल्डन, निर्माण की एक प्रक्रिया है जो धातुएँ तथा थर्मोप्लास्टिक जोड़े को जोडने के काम आती है।
फ्यूजन वेल्डिंग धातुओं को उनके गलनांक तक गर्म करके जोड़ने की प्रक्रिया है। इसका उपयोग एयरोस्पेस, ऑटोमोटिव और कारखानों में किया जाता है।
स्टिक वेल्डिंग का उपयोग औद्योगिक विनिर्माण में लोहे और इस्पात सामग्री को वेल्ड करने के लिए किया जाता है।